वाक्य (The Sentences)

वाक्य: अंग, भेद, रचना है। Vakya In Hindi Grammar

शब्द भाषा की एक स्वतंत्र इकाई है। भाषा में वाक्यों की रचना इन्हीं शब्दों से होती है, लेकिन इन शब्दों को यथावत् रूप में हम एक स्थान पर रख दें तो वाक्य नहीं बन सकता। वाक्यों में प्रयुक्त करने से पहले शब्दों को पद बनाया जाता है,  तभी यह वाक्य में प्रयुक्त हो सकते है, जेसे यदि हम’ ‘है गाता गाना सजल’ शब्दों को एक साथ रखकर बोलते है तो वह सार्थक वाक्य नही कहलाएगा। सार्थक वाक्य होते है, जब हम इन शब्दों को व्यवस्थित करके उच्चारण करेंगे- जैसे “सजल गाना गाता है।“ यह सार्थक वाक्य कहलाएगा।

सार्थक शब्दों को वह व्यवस्थित समूह जिससे उपेक्षित अर्थ प्रकट हो, वाक्य कहलाता है।

वाक्य के मुख्य तत्व:

  1. सार्थकता       
  2. योग्यता                   
  3. आकांक्षा
  4. निकटता
  5. पदक्रम
  6. अन्वय

 

  1. सार्थकता- यह वाक्य का प्रमुख गुण है। वाक्य का कुछ-न-कुछ सार्थक अर्थ अवश्य होना चाहेये। जैसे- धक-धक शब्द अपने आप में निरर्थक शब्द है |परन्तु जब किसी वाक्य में प्रयोग किया जाता है तो यह सार्थक बन जाता है; जैसे- तेज बारिश को देखकर मेरा दिल धक-धक करने लगा।
  2. योग्यता– वाक्य में बोध करने वाली योग्यता होनी चाहिए;

जैसे- प्रखर बाज़ार की सम्मुख जा रहा है। इस वाक्य में प्रयुक्त सभी शब्द सार्थक है, परंतु यह वाक्य सही अर्थ नही दे रहा है। ‘सम्मुख’ शब्द सार्थक होते हुए भी वाक्य के अनुकूल नहीं है।यहाँ सम्मुख शब्द के स्थान पर ओर शब्द प्रयुक्त होना चाहिए।

  1. आकांक्षा- वाक्य स्वयं में इतना पूर्ण होना चाहिए कि भाव को समझने कि आवश्यकता ना हो; जैसे – कोई व्यक्ति यदि कहे कि ‘जाता है’ इस वाक्य में कर्ता को जानने कि इच्छा होगी।
  2. निकटता- बोलते या लिखते समय वाक्य के शब्दों में निकटता का होना आवश्यक है। जेसे- जब भी कोएई वाक्य कहा जाए तो उसमें निकटता हो। जेसे आधा अभि ओर आधा वाक्य यदि कुछ देर बाद कहा जाएगा तो उसका अर्थ स्पष्ट होना मुश्किल हो जाएगा। यदि कोई वाक्य बोला जा रहा है तो वह पूरा वाक्य एक साथ बोला जाये।
  3. पदक्रम- वाक्य में पदों को एक निश्चित क्रम में होना आवश्यक होता है;

जैसे- जाती है प्रज्ञा शहर। इसका सही क्रम है, प्रज्ञा शहर जाती है।

  1. अन्वय– वाक्य में व्याकरण कि दृष्टि से लिंग, पुरुष, वचन, कारक, काल आदि का क्रिया के साथ ठीक-ठीक मेल होना चाहिए।

वाक्य के अंग (घटक)

वाक्य के दो अंग है- (1)  उदेश्य (2) विधेय

(1) उदेश्य- वाक्य में जिस के विषय में बताया जाता है, उसे उदेश्य कहते है; जैसे- सारिका हँसती है। इसमे सारिका के विषय में बतया गया है अत: सारिका उदेश्य है।

(2) विधेय– वाक्य में उदेश्य के विषय में जो कुछ कहा जाता है उसे विधेय कहते है; जैसे- पारुल पढ़ती है। इस वाक्य में पढ़ती है विधेय है।

वाक्य के भेद:

वाक्य का विभाजन दो आधार पर किया जाता है

  1. रचना के आधार पर                                        
  2. अर्थ के आधार पर

रचना की दृष्टि से वाक्य के भेद

(क) सरल वाक्य

(ख) मिश्र वाक्य

(ग) संयुक्त वाक्य

(क) सरल वाक्य

जिन वाक्यों में एक मुख्य क्रिया हो. उन्हें सरल वाक्य कहा जाता है। सरल वाक्य में एक क्रिया का होना आवश्यक है।

  • पिताजी पुस्तक पढ़ रहे है।
  • सजल सो रहा है।
  • जूबी आज स्कूल नहीं गई।

(ख) मिश्र वाक्य

वे वाक्य जिसमें साधारण वाक्य के साथ एक या एक से अधिक उपवाक्य हों, उन्हें मिश्र वाक्य कहते हैं। ये उपवाक्य परस्पर. योजको, जैसे कि यदि. तो, तथापि. इसलिए आदि से जुड़े हुए होते हैं।

  • उसने जो परीक्षा दी, वह दसवीं की थी।
  • आश्चर्य है कि वह जीत गया ।
  • काम समाप्त हो जाए तो जा सकते हो
  • जब तुम लौटकर आओगे तब मैं आऊँगा।

(ग) संयुक्त वाक्य

जहाँ दो या दो से अधिक सरल वाक्य योजक शब्द (अत:, इसलिए, तो, फिर भी, किन्तु, परन्तु, लेकिन, पर) से जुड़े होते हैं, संयुक्त वाक्य कहलाते हैं। ये दोनों ही वाक्य स्वतंत्र अर्थ देने में सक्षम होते हैं। जैसे-

  • हमने पानी बरसता हुआ देखा और घर में शरण ली।
  • राम पढ़ रहा था परन्तु रमेश सो रहा था।
  • सत्य बोलो परंतु कटु सत्य मत बोलो।

अर्थ के आधार पर वाक्य के भेद

(क) विधानवाचक          (ख) निषेधवाचक

(ग) आज्ञावाचक           (घ) प्रश्नवाचक

(ङ) विस्मयवाचक          (च) इच्छावाचक

(छ) सदेहवाचक            (ज) संकेतवाचक

(क) विधानवाचक

जिस वाक्य में किसी कार्य के होने या करने की सामान्य सूचना मिलती है, उसे विधानवाचक वाक्य कहते है।

  • राकेश दिल्ली गया।
  • सूर्य पूरब से निकलता है।
  • हिन्दी हमारी राष्ट्रभाषा है।

 (ख) निषेधवाचक

जिस वाक्य में किसी कार्य के न होने का बोध हो, उसे निषेधवाचक वाक्य या नकारात्मक वाक्य कहते हैं, जैसे

  • सजल आज नहीं गायेगा।
  • आज हिन्दी की कक्षा नहीं लगेगी।
  • मैं आशीष के पास नहीं जाऊँगी।

(ग) आज्ञावाचक

जिन वाक्यों से आज्ञा या अनुमति देने का बोध होता है. उन्हें आज्ञावाचक वाक्य कहते हैं, जैसे

  • जल्दी खाना खाओ।
  • एक गिलास पानी लाओ।
  • बड़ों का आदर करो।

(घ) प्रश्नवाचक

जिन वाक्यों में किसी प्रकार का प्रश्न पूछे जाने का बोध होता है, उन्हें वाचक वाक्य कहते हैं। जैसे

  • तुम्हारा नाम क्या है?
  • आकाश तुम कहाँ जा रहे हो?
  • सतनाम तुम्हारा घर कहाँ है?

(ङ) विस्मयवाचक

जिस वाक्य से आश्चर्य, शोक, हर्ष, विस्मय, घृणा आदि के भादू द्धक्त हो, उन्हें विस्मयवाचक वाक्य कहते हैं, जैसे-

  • ओह, वह बीमार पड़ गया।
  • अहा! कितना सुन्दर दृश्य है।
  • अरे! वह कहाँ चला गया।
  • उफ कितनी गर्मी है।
  • वाह! क्या खूब बारिश हुई।

(च) इच्छावाचक

जिस वाक्य में इच्छा, आशीर्वाद, शुभकामना का बोध हो, इच्छावाचक वाक्य कहलाते है: जैसे-

  • नववर्ष मंगलमय हो।
  • ईश्वर करे आप जल्दी स्वस्थ हो।
  • प्रभु तुम्हें दीर्घायु प्रदान करे।

(छ) संदेहवाचक

जिन वाक्यों में कार्य के होने या न होने में संदेह रहता है, उन्हें संदेहवाचक वाक्य कहते हैं, जैसे

  • शायद अमृत कल आए।
  • शायद में कल बाहर जाऊँ।
  • शायद राजू आज आगरा आए।

(ज) संकेतवाचक

जिन वाक्यों में एक क्रिया का होना दूसरी क्रिया पर निर्भर होता है। वह संकेतवाचक वाक्य कहलाते है; जैसे-

  • आप साथ में जाते तो इतनी मुसीबत न होती।
  • यदि तुम दिन-रात कड़ी मेहनत करते तो पास हो जाते।
  • यदि तुम नियमित दवा खाते तो स्वस्थ हो जाते।
Important Topics Of Hindi Grammar (Links)
हिन्दी भाषा का विकासवर्ण विचारसंधि
शब्द विचारसंज्ञासर्वनाम , विशेषण
क्रियालिंगवचन
कारककालपर्यायवाची शब्द
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